कई दशकों तक, केंद्रीय बजट के बाद पालखीवाला के व्याख्यान पूरे देश में चर्चा का विषय बनते थे। कहा जाता था कि भारत में दो बजट भाषण होते हैं- एक वित्त मंत्री का और दूसरा नानी पालखीवाला का, निसंदेह दूसरा अधिक प्रभावशाली भाषण माना जाता था।
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